मैं कैसे बताऊँ आपको, की क्या हो आप मेरी
मैं कितना बताऊँ आपको, की क्या हो आप मेरी
फ़ितना-ख़ेज़ जीवन, दिल है सफ़ीना सा मेरा
मैं नाव खेता सैलानी, दरिया हो आप मेरी
सूरज का शाम से जो, है रिश्ता बर्फ़ और सूरज का
टूट कर बरसे वो, सावन की घटा हो आप मेरी
मेरा संसार सहरा का, मेरा जीवन बीहड़ था
मैं मुसाफ़िर और, मेरे घर की पनाह हो आप मेरी
अब और कितने, तश्बीहों से बुलाऊँ 'निसार'
मेरे सीने से लगी, ज़ाती ख़ुदा हो आप मेरी
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