मेरे महबूब ने क़ुरबत का, ये सिला दिया मुझको
मुझसे इतनी की मोहब्बत, कि रुला दिया मुझको
मैंने मांगा था, मौत से बेहतर कोई आराम
तुमने अपनी गोद में, सुला लिया मुझको
बदन का सारा लहू, खिँचकर रुख़ पर आ गया
जब मैंने बहोत प्यार से, बोसा दिया तुझको
साँसों में हरारत, उनकी आँखों में शर्म थी
नाखून गड़ाए मुझमें, पर इनकार न किया मुझको
उनकी गोद में सर रखकर, उनकी आँखों के हो गए
इस साझा सपने ने, सातवे अर्श पर ला दिया मुझको
मेरे हाथों में तेरा चहरा, तेरी आँखें मेरी आँखों में
मेरे गोद की बिना में, आँखों से पिला दिया मुझको
अपने हाथों से, एक दूसरे को यूँ खिलाया हमनें
कि उसकी ममता ने, अपना बना लिया मुझको
होठों पे तबस्सुम, उनके दिल में हामी थी
हाथ सीने पे रखकर, अपना हाल सुना दिया मुझको
मैंने पाँव दबाए उनके, उन्होंने पाँव छू लिए
और सबके सामने, अपनी शानों पे सजा लिया मुझको
ज़माने की भीड़, और था वक़्त का तक़ाज़ा भी
हक़ जताकर तुमने, होठों से सजा दिया मुझको
मुझे चूर चूर कर दिया, अपनी बाहों में भरकर
बाहों में समेटकर, फ़िर विदा किया मुझको
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