मैं इस ज़माने में, ज़मानी न बन सका
इश्क़ मेरा, दिल्लगी सा, फ़ानी न बन सका
तू सुनाए मजमे में, अपनी सहेलियों को
मैं चाह कर भी, ऐसी कहानी न बन सका
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