Monday, 5 February 2024

बताओ न

बताओ न,

बताओ न,

बताती क्यों नहीं !


जब प्यार है,

तुम्हें हमसे,

जताती क्यों नहीं !


वक़्त के फ़ासले हैं, हमारे दरम्यान

इन दूरियों को तुम, मिटाती क्यों नहीं !


बताओ न,

बताओ न,

बताती क्यों नहीं !


जब प्यार है,

तुम्हें हमसे,

जताती क्यों नहीं !


खिलाओगी तो खाएँगे, तुरई और करेला भी

अपने हाथों से मुझे, खिलाती क्यों नहीं !


बताओ न,

बताओ न,

बताती क्यों नहीं !


जब प्यार है,

तुम्हें हमसे,

जताती क्यों नहीं !


पगलु हैं, शोनू हैं, कुकुल्लु हैं तुम्हारे

ऐसे और नामों से मुझे, बुलाती क्यों नहीं !


बताओ न,

बताओ न,

बताती क्यों नहीं !


जब प्यार है,

तुम्हें हमसे,

जताती क्यों नहीं !


हमारे कल में, सितारों की चादर बिछी है

तुम पलकों को राहों में, बिछाती क्यों नहीं !


बताओ न,

बताओ न,

बताती क्यों नहीं !


जब प्यार है,

तुम्हें हमसे,

जताती क्यों नहीं !


बग़ैर शराब के मुझे, यहाँ मख़मूर होना है

अपनी आँखों से, तुम मुझे पिलाती क्यों नहीं !


बताओ न,

बताओ न,

बताती क्यों नहीं !


जब प्यार है,

तुम्हें हमसे,

जताती क्यों नहीं !

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