बताओ न,
बताओ न,
बताती क्यों नहीं !
जब प्यार है,
तुम्हें हमसे,
जताती क्यों नहीं !
वक़्त के फ़ासले हैं, हमारे दरम्यान
इन दूरियों को तुम, मिटाती क्यों नहीं !
बताओ न,
बताओ न,
बताती क्यों नहीं !
जब प्यार है,
तुम्हें हमसे,
जताती क्यों नहीं !
खिलाओगी तो खाएँगे, तुरई और करेला भी
अपने हाथों से मुझे, खिलाती क्यों नहीं !
बताओ न,
बताओ न,
बताती क्यों नहीं !
जब प्यार है,
तुम्हें हमसे,
जताती क्यों नहीं !
पगलु हैं, शोनू हैं, कुकुल्लु हैं तुम्हारे
ऐसे और नामों से मुझे, बुलाती क्यों नहीं !
बताओ न,
बताओ न,
बताती क्यों नहीं !
जब प्यार है,
तुम्हें हमसे,
जताती क्यों नहीं !
हमारे कल में, सितारों की चादर बिछी है
तुम पलकों को राहों में, बिछाती क्यों नहीं !
बताओ न,
बताओ न,
बताती क्यों नहीं !
जब प्यार है,
तुम्हें हमसे,
जताती क्यों नहीं !
बग़ैर शराब के मुझे, यहाँ मख़मूर होना है
अपनी आँखों से, तुम मुझे पिलाती क्यों नहीं !
बताओ न,
बताओ न,
बताती क्यों नहीं !
जब प्यार है,
तुम्हें हमसे,
जताती क्यों नहीं !
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