The Professor
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Shayari
Friday, 14 February 2025
गुरूर
क्या उसीको रुस्वा किया, जिसका ग़ुरूर बनना था ?
कहाँ अस्ली बन बैठा ? मुझे तो बा-शु'ऊर बनना था !
तुम हैरान क्यों हो ? तुम तो मुझे जानती थी न !
मुझे मरहम बनना था 'निसार', न कि नासूर बनना था
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