ऐ बेदर्द, मुझ मुफ़लिस पर, ये अज़ाब न कर
परों को नोच कर, पंछी को आज़ाद न कर
खोखले, दरख़्त-नुमा तअल्लुक हैं, बह जाएँगे
बाढ़ के मौसम में, यार ये मज़ाक़ न कर
तेरा चहरा ही सूरज है, इन दिल के अंधेरों में
हाल पूछकर, फ़िलहाल मुझे नाशाद न कर
मदावा न सही लेकिन, तेरा होना भी राहत है
मैं मर जाऊँगा, मेरी बीमारी का इलाज न कर
बा-समर शाख़ का, लचक जाना है लाज़मी
पर आरज़ी दिल्लगी में, 'निसार' मुझे बर्बाद न कर
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