The Professor
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Shayari
Monday, 17 October 2022
नागवार
मेरी आदतें नागवार और मेरा साथ तो सज़ा था न !
तुमसे हारने पर ये सलूक क्यों? तुमसे जीतना तो ख़ता था न !
मेरा अपने भीतर झाँकना, तुम्हें हर सितारे में देखना
तुम क्यों न ये सब समझ सकी ? तुम्हें तो सब पता था न !
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