ख़याल-ए-रंज-ओ-माज़ी, आज फ़िर रुला गए याद करके उसकी याद को, क्या क्या भुला गए उसकी जुदाई में, तिश्नगी का, आलम देखिए उस अज़ीज़, प्याला-ए-शराब में, सारी उम्र घुला गए
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