बंद आँखों से, किसी तस्वीर को निहारा करते हैं हाँ धुंधली सही, किसी तरह गुज़रा करते हैं ख़ौफ़-ए-हिज्र में, किसी साए को दूर जाते देख नींद से उठ उठकर, जाने किसे पुकारा करते हैं
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