Tuesday, 24 September 2019

कुछ यूँ की मोहब्बत...

कुछ यूँ की मोहब्बत, कि हद से गुज़र गए
एक उसकी ओर चलना याद है, फ़िर जाने किधर गए

इतनी शिद्दत से किया हमने, गुनाह इश्क़ का
ऐसी ख़स्ता हालत देख, हमारे फ़रिश्ते मुकर गए

उसके दिल के निकाले हम, आवारा हो गए
फ़िर जिस दर पे मिली पनाह, उस दर गए

उसके घर ने समझा जैसा, नहीं बेग़ैरत वैसे हम
लानत है हमपर,  उस गली दोबारा अगर गए

जो शर्मिंदा हुए बहोत, महज़ मौजूदगी से हमारी
जाओ कहदो उन रसूखदारों से, कि हम मर गए

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