हालाँकि, तुझसे शिकवों की इजाज़त नहीं है
पर बारज़ा कुछ भी करना, मेरी आदत नहीं है
है खटका, मुझे तेरे ख़फ़ा होने का
तुझे न छेड़ना, मेरी शराफ़त नहीं है
है शायरी में, कितनों को डुबोया तूने
मुझे अपनी हालत से, हैरत नहीं है
हूँ ज़िंदा ज़रूर तेरे, बग़ैर भी लेक़िन
ये झूठ होगा कहना, कि तेरी ज़रूरत नहीं है
भीगे तकिये गवाह हैं,अफ़्सुर्दगी के मेरे
मैं कह कैसे दूँ कि, तुझसे मोहब्बत नहीं है
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