छलकते हुस्न से, शैदाई को भिगोया नहीं करते खुद ही को देख दर्पण में, खोया नहीं करते ये शातिर चाँद चुपके से, तुझको देख लेता है दरीचे खोलकर, ऐ बेपरवाह, सोया नहीं करते
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