वो जो हमारी ख़ामियों के क़िस्से सुनाया करते हैं चुपके से अक्सर वही अकेले में बुलाया करते हैं हमारी नज़रों के साए को कोई दिल्लगी न समझे हम आँखों में झाँककर दिल को चुराया करते हैं
No comments:
Post a Comment