Saturday, 20 April 2019

लत

गुल सूख जाएँ तो भी महक रूठती नहीं
साँस टूट कर भी इश्क़ में टूटती नहीं
कोशिशें तमाम की उसे भूल जाने की
पर लत हुस्न की है साहब छूटती नहीं

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