आशिक़ शिकार वो ही गुनहगार हो जाए ख़ातिर इंसाफ़ के वो अब किसके दर जाए एहतियातन सुनाओ गैरों को दास्ताँ अपनी कहीं ज़बाँ पर उसका नाम न आ जाए
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