Sunday, 21 November 2021

मिल्कियत

जिनकी मिलकियत हो मुश्तबा, वो अश्क़ पोंछना क्या!
वो अदाकारा है, उसके आँसू क्या, उसका रोना क्या!
उसके दिल कि चौखट से दूर, कहीं रौंदे मिलेंगे हम
गुल-ए-परस्तिश के नसीब में, क्या गली और कोना क्या!

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