लंबा है सफऱ तू मुझे साथ ले चल
साथ पुर-ख़तर है मेरा, साथ न चल
लबों से करूँ सजदा, अश्कों से पाँव धोऊँ
बिखर पाऊँ गर साजन , बिछाऊँ राह में आँचल
बेरहम गुनाहों के छाले लिए दिलपर
सफ़र तन्हा है मेरा, मेरी मंज़िल है मक़तल
बाहें सूनी हैं, हैं सूनी कराहें मेरी
ठहर न सही, पर मिलता रह मुसलसल
मुंसलिक करके, मुँह फ़ेर लोगे मुझसे
तन्हा रह जाएँगे, निसार और निसार की ग़ज़ल
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