तेरे दिल, ज़हन, दिमाग़ में कहीं नहीं हैं हम
जहाँ तू छोड़कर जाती है, वहीं कहीं हैं हम
सोचना ज़रूर चाहते हैं, हम ख़ास हैं तेरे
पर जानते हैं, इस बार सही नहीं हैं हम
आँख नम नहीं तेरे, मेरा हाल देखकर भी
इतना बता, क्या तेरे कुछ भी नहीं हैं हम
जिन यादों को याद कर, तेरे होंठ मुस्कुराएँ
यार क्या बताएँ, बस वहीं कहीं हैं हम
एक दिल भी बसता है, इस जिस्म के भीतर
'निसार' सिर्फ़, तेरे शग़्ल की ज़मीं नहीं हैं हम
No comments:
Post a Comment