जो तुझसे मिला मुझे, वो मर्ज़ क्या है ?
मोहब्बत में मुझपर, ये कर्ज़ क्या है ?
गालों तक नहीं पहुँचे, तेरे अश्क़ आँखों से
मेरे होंठ वाकिफ़ हैं, कि उनका फ़र्ज़ क्या है !
आँखों के दर पर जब, नींद दस्तक दे
मेरी शानों पर सर रख ले, हर्ज़ क्या है !
है नूरानी चहरा क्यों, ज़ुल्फ़ की आड़ में
मेरे सूरज को, ढकने का, ये तर्ज़ क्या है !
ओढ़े हुए थी तू, चांदनी की चादर को
लिखें ग़ज़ल या क़सीदे, अर्ज़ क्या है ?
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