अपने दीवाने को इतना, सताया न करो
सिर्फ़ मिलना है, तो मिलने आया न करो
चुराए हैं कुछ लम्हें, वक़्त की किताब से
रस्मों रिवाजों में उन्हें, यूं ज़ाया न करो
सर-ओ-नाज़ किए हैं, सदके तुम्हारे
हमें, तुम्हारी चौखट से, उठाया न करो
तुम्हारी गोद में सनम, मौत सा आराम है
मौत से, हमें हमारी, जगाया न करो
हाँ उसी की देन है, ये शेर-ओ-सुखन लेकिन,
यार हर बात में, ज़िक्र उसका, लाया न करो
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