Sunday, 23 February 2020

पहलू

फ़क़त मैं ही हूँ, मेरी तक़दीर पर, रोने वाला
सब हासिल कर, सिर्फ़ उसको खोने वाला

बारिश-ए-पुर्सा, कर रहा है, आज बहोत
मुझे मेरे ही, आँसुओं में, डुबोने वाला

वो भी, अपनी तस्वीर, वहाँ देख न सका
मेरे सीने में, नश्तर-ए-जफ़ा, चुभोने वाला

उसकी भी उड़ी नींद, मेरी ग़ज़ल सुनकर 
कई बरसों से, मेरी चीख़ पर, सोने वाला

मेरे पहलू में, गुज़ारी हैं, कई शामें उसने
वो जो आज है, किसी और का होने वाला

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