सिर्फ़ ज़बाँ से नहीं, आँखों से भी बात करती हो
आवाज़ो से भरे, मेरे दिल की महफ़िल में
अपनी बोली से, शोर को सुकात करती हो
भली सी सूरत, प्यारी आँखों से लैस होकर भी
मेरे नाज़ुक से, भोले दिल पे रि'आत करती हो
चाहता हूँ कि तू आए, और उम्र भर न जाए कहीं
मेरी छोटी सी दुनिया को, तुम आबाद करती हो
एक निगाह डालकर 'निसार' को क़ैद कर दिया
फिर एक और नज़र से, मुझे आज़ाद करती हो
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