Thursday, 20 April 2023

राज़

एक ग़ज़ल जिसे लिखा नहीं, एक राज़ जो खुला नहीं
मैं गैर था चलो ठीक है, मेरे हस्ती से बैर भला नहीं
वो आखरी मुलाकात अपनी, बे-अंजाम सी थी
कि उस रोज़ मैं मरा न था, और फ़िर जिया नहीं

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