दिल में तुझको रखकर, ये हिमाकत करें कैसे !
जज़्बात से महरूम, हम मोहब्बत लिखें कैसे !
गुलों से होंठ, ऐ गुलिस्तां से चहरे वाले
हम सिर्फ़ नजरों से, तेरी सजावट करें कैसे !
स्याह काजल, या सुर्ख़ शिकस्ता गेसू लिखें ?
गेहुएं रंग पर हाय, ये इतनी मुसीबात लिखें कैसे !
आज फिर दोबारा देखकर, आजाद कर दे हमें
अदालत-ए-इश्क में, हम तेरी वकालत करें कैसे !
तुझे एक टक निहारें, या तेरी पहलू में आ बैठें
खस्ता-हाल ' निसार', हम ये तिजारत करें कैसे !
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