यूँ तो कहने को साथ जहाँ होता है जुस्तजू जिसकी वो जाने कहाँ होता है मैं उसकी सूरत से नज़रें न फेरुँ कैसे! जिसके दीदार भर से दर्द जवाँ होता है
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