इश्क़, दो दिलों की सोहबत है, जताई नहीं जाती
ये आग, ख़ुद ब ख़ुद लगती है, लगाई नहीं जाती
वो जब तकती है एकटक, किसी की ओर
फ़िर उस शख़्स से, ख़ुशी उसकी छुपाई नहीं जाती
वो आँखों से पूछती है, क्या मेरे नहीं हो तुम ?
मुझसे अक्सर दिल की, बात मेरे बताई नहीं जाती
वो जब बैठी थी परसुकूँ, आंगन में मेरे
उसकी वो याद, यादों से, भुलाई नहीं जाती
जाने क्या लिखा है, उसकी ज़ुल्फ़ों की क़िस्मत में
साया करती ज़रूर हैं, पर मुझपे छाई नही जातीं
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