Thursday, 23 April 2020

मर्ज़ी

ये दूरियाँ कहीं, उसकी मर्ज़ी तो नहीं ?!
उसकी मजबूरियाँ, कहीं ख़ुदगर्ज़ी तो नहीं ?!
जो अश्क़ पोछने चले हो, सादा-लौह सदीक
वो आँसू, वो आँसू कहीं फ़र्ज़ी तो नहीं ?!

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